अंतरराष्ट्रीय

सोशल मीडिया पर अविश्वसनीय स्रोतों तक अधिकांश लोगों की पहुंच सीमित, नए अध्ययन में दावा

[tta_listen_btn listen_text="खबर सुनें" pause_text="Pause" resume_text="Resume" replay_text="Replay" start_text="Start" stop_text="Stop"]

(मैरियन-आंद्रे रिजोउ, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी सिडनी) सिडनी, 30 जुलाई (द कन्वरसेशन) सोशल मीडिया पर हमें जो कुछ दिखाई देता है, उसमें कितना हिस्सा ऐसी पोस्ट का होता है, जो बार-बार झूठी जानकारी फैलाने वाले स्रोतों से आती हैं? और अगर ऐसी सामग्री आपकी ‘फीड’ से चुपचाप हटा दी जाए, तो क्या कुछ महीनों बाद आपकी सोच या मान्यताओं में कोई बदलाव आएगा? इन्हीं सवालों का जवाब तलाशने की कोशिश की है ‘साइंस एडवांसेज’ में प्रकाशित एक नए अध्ययन ने।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button