Diwali 2026: लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीदने जा रहे हैं? सूंड की दिशा से लेकर आकार तक, इन 7 बातों का रखें ध्यान

दिवाली की तैयारियों के बीच घर की सजावट और पूजा की खरीदारी का सिलसिला शुरू हो जाता है। धनतेरस से ही बाजारों में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की सुंदर प्रतिमाएं सजने लगती हैं। मान्यता है कि दिवाली पर नई लक्ष्मी-गणेश प्रतिमाओं की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। ऐसे में अगर आप भी इस बार पूजा के लिए नई मूर्तियां खरीदने जा रहे हैं, तो केवल उनकी सुंदरता ही नहीं, बल्कि कुछ धार्मिक और वास्तु मान्यताओं का भी ध्यान रख सकते हैं।
आखिर माता लक्ष्मी की प्रतिमा किस मुद्रा में होनी चाहिए? गणेशजी की सूंड किस दिशा में होनी चाहिए और घर के मंदिर के लिए मूर्ति का आकार कितना उचित माना जाता है? आइए जानते हैं ऐसी ही जरूरी बातें।
1. कमल पर विराजमान हों माता लक्ष्मी
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, दिवाली पूजन के लिए माता लक्ष्मी की बैठी हुई प्रतिमा को प्राथमिकता दी जाती है। ऐसी मूर्ति जिसमें मां कमल के फूल पर विराजमान हों, शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि खड़ी मुद्रा वाली प्रतिमा घर में धन की स्थिरता के लिहाज से अनुकूल नहीं होती।
2. धन वर्षा करती हुई हो मां की प्रतिमा
माता लक्ष्मी की ऐसी प्रतिमा को भी शुभ माना जाता है, जिसमें उनके हाथ से स्वर्ण मुद्राओं या धन की वर्षा होती दिखाई दे। इसे सुख-समृद्धि और संपन्नता का प्रतीक माना जाता है।
3. गणेशजी की सूंड बाईं ओर हो
भगवान गणेश की प्रतिमा खरीदते समय उनकी सूंड की दिशा पर भी ध्यान देने की सलाह दी जाती है। वास्तु मान्यताओं के मुताबिक, घर में पूजा के लिए बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेशजी यानी वाममुखी गणेश की प्रतिमा शुभ मानी जाती है। इसे गृहस्थ जीवन के लिए अनुकूल स्वरूप बताया गया है।
4. गुलाबी, सुनहरे और हल्के पीले रंग को दें प्राथमिकता
लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाओं के रंग को लेकर भी कुछ वास्तु मान्यताएं प्रचलित हैं। गुलाबी, सुनहरे और हल्के पीले रंग की मूर्तियां शुभ मानी जाती हैं। प्रतिमाओं पर लाल, गुलाबी या पीले रंग के वस्त्र भी पसंद किए जाते हैं। वहीं, कुछ वास्तु विशेषज्ञ गहरे और काले रंग की प्रतिमाएं लेने से बचने की सलाह देते हैं।
5. घर के मंदिर के लिए कितना हो मूर्ति का आकार?
घर में पूजा के लिए लक्ष्मी-गणेश की छोटी प्रतिमाएं रखने की सलाह दी जाती है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, एक से नौ इंच तक की मूर्तियां घर के मंदिर के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं। मान्यता है कि बड़ी प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा और पूजा के नियम अधिक विस्तृत होते हैं, इसलिए उन्हें आमतौर पर मंदिरों में स्थापित किया जाता है।
6. मूर्ति खरीदते समय जरूर जांचें ये बातें
- प्रतिमा खंडित न हो: मूर्ति में दरार, टूट-फूट या चटकन नहीं होनी चाहिए। खरीदने से पहले उसे अच्छी तरह जांच लें।
- लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं अलग-अलग हों: दोनों देवी-देवताओं की अलग-अलग मूर्तियां लेने की सलाह दी जाती है। ऐसी प्रतिमा से बचें, जिसमें दोनों की आकृतियां आपस में जुड़ी हों।
- वाहन का स्वरूप देखें: भगवान गणेश की प्रतिमा के साथ उनका वाहन मूषक होना चाहिए। माता लक्ष्मी के साथ उल्लू या हाथी का स्वरूप भी शुभ माना जाता है।
श्रद्धा और परंपरा के अनुसार करें चयन
दिवाली पूजन के लिए लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा खरीदते समय इन बातों को ध्यान में रखा जा सकता है। हालांकि, मूर्ति की मुद्रा, रंग, आकार और अन्य विशेषताओं से जुड़े ये नियम वास्तु एवं धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसलिए प्रतिमा का चुनाव अपनी श्रद्धा, पारिवारिक परंपरा और पूजा की व्यवस्था को ध्यान में रखकर करें।



