दिवाली पर पटाखे जलाने से पहले जान लें ये नियम, ज्यादा आवाज पर होगी कार्रवाई?

दिवाली पर घर रोशनी से सजते हैं और बाजारों में पटाखों की रौनक दिखाई देने लगती है, लेकिन जश्न के बीच होने वाला तेज शोर कई लोगों के लिए परेशानी बन जाता है। छोटे बच्चों की नींद टूटती है, बुजुर्गों और बीमार लोगों को दिक्कत होती है और पालतू जानवर डरकर इधर-उधर भागने लगते हैं। तेज आवाज से सुनने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।
ऐसे में पटाखे जलाने से पहले यह जानना जरूरी है कि कानून ने आवाज की कितनी सीमा तय की है। रात में किस समय पटाखे जलाना मना है? अगर पड़ोस में देर रात तक तेज धमाके हो रहे हैं तो शिकायत कहां करें? और नियम तोड़ने पर कितनी कार्रवाई हो सकती है? इन सवालों के जवाब जान लीजिए।
पटाखे की आवाज कितनी होनी चाहिए?
पटाखों के लिए ध्वनि की अलग सीमा निर्धारित है। तय मानक के मुताबिक, पटाखा फूटने की जगह से चार मीटर की दूरी पर आवाज 125 डेसीबल (dB AI) या 145 डेसीबल (dB C Peak) से अधिक नहीं होनी चाहिए। इससे ज्यादा आवाज पैदा करने वाले पटाखों का निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल प्रतिबंधित है।
ध्यान रखें कि यह सीमा पटाखे से निकलने वाली आवाज के लिए है। आपके मोहल्ले या बाजार में पूरे समय रहने वाले शोर की सीमा इससे अलग होती है।
आपके इलाके में शोर की कितनी सीमा तय है?
ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियमों के तहत अलग-अलग क्षेत्रों के लिए दिन और रात में शोर की अधिकतम सीमा तय की गई है।
| क्षेत्र | दिन में सीमा | रात में सीमा |
|---|---|---|
| आवासीय क्षेत्र | 55 डेसीबल | 45 डेसीबल |
| व्यावसायिक क्षेत्र | 65 डेसीबल | 55 डेसीबल |
| औद्योगिक क्षेत्र | 75 डेसीबल | 70 डेसीबल |
| साइलेंस जोन | 50 डेसीबल | 40 डेसीबल |
यहां दिन का समय सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक और रात का समय रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक माना जाता है।
एक बात समझना जरूरी है। ये सीमाएं किसी एक पटाखे के धमाके की नहीं, बल्कि निर्धारित समय में आसपास के वातावरण के औसत शोर स्तर की हैं। इसलिए मोबाइल ऐप पर एक बार दिखाई देने वाली रीडिंग से यह तय नहीं किया जा सकता कि कानूनी उल्लंघन हुआ है या नहीं।
रात में कितनी देर तक जला सकते हैं पटाखे?
रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक शोर पैदा करने वाले पटाखे जलाने पर रोक है। दिवाली पर पटाखे जलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट और स्थानीय प्रशासन के आदेशों का पालन करना जरूरी है। त्योहार के मौके पर जारी विशेष आदेश के अनुसार समय में बदलाव हो सकता है।
इसलिए पिछले साल का समय इस साल के लिए सही मानकर न चलें। पटाखे खरीदने या जलाने से पहले अपने जिले के डीएम, पुलिस कमिश्नरेट या स्थानीय प्रशासन की ताजा सूचना जरूर देख लें।
दिल्ली-एनसीआर के लिए 2026 का विशेष आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने इस साल दिल्ली-एनसीआर में 7 और 8 नवंबर को प्रमाणित ग्रीन पटाखे सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक जलाने की अनुमति दी है। अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों, शिक्षण संस्थानों और अधिसूचित साइलेंस जोन के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाने पर रोक रहेगी। यह विशेष आदेश दिल्ली-एनसीआर के लिए है, इसे लखनऊ या उत्तर प्रदेश के दूसरे शहरों पर स्वतः लागू न मानें।
पटाखों का शोर कैसे मापें?
अगर आपके इलाके में लगातार तेज आवाज हो रही है तो शोर का स्तर मापने के लिए साउंड लेवल मीटर का इस्तेमाल किया जाता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अधिकृत अधिकारी ऐसे उपकरणों से ध्वनि की जांच कर सकते हैं।
मोबाइल फोन में उपलब्ध नॉइज मीटर ऐप से आवाज का शुरुआती अंदाजा जरूर मिल सकता है, लेकिन इसे कानूनी सबूत या सरकारी माप नहीं माना जा सकता। फोन के माइक्रोफोन और ऐप की गुणवत्ता के कारण रीडिंग में अंतर हो सकता है।
पटाखे के पास जाकर आवाज मापने की कोशिश न करें। इससे चोट लगने और कानों को नुकसान पहुंचने का खतरा है।
आपके इलाके में देर रात तक पटाखे फूट रहे हैं तो क्या करें?
अगर कोई लगातार प्रतिबंधित समय में पटाखे जला रहा है या तेज शोर से आसपास के लोगों को परेशानी हो रही है तो आप शिकायत कर सकते हैं।
- सबसे पहले घटना का समय और जगह नोट कर लें।
- सुरक्षित दूरी से संभव हो तो वीडियो या ऑडियो रिकॉर्ड कर लें।
- शिकायत स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन या राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से करें।
- शिकायत दर्ज कराने पर उसका नंबर और संबंधित अधिकारी का विवरण सुरक्षित रखें।
- आग लगने, चोट पहुंचने या किसी अन्य तत्काल खतरे की स्थिति में आपातकालीन सेवा से संपर्क करें।
शिकायत के लिए किसी से बहस या झगड़ा करने की जरूरत नहीं है। रिकॉर्डिंग बनाने के लिए किसी की निजी जगह में प्रवेश न करें और जलते हुए पटाखे को छूने की कोशिश बिल्कुल न करें।
नियम तोड़ने पर कितनी सजा हो सकती है?
पटाखों से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई इस बात पर निर्भर करती है कि मामला किस तरह का है। प्रतिबंधित समय में पटाखे जलाने, तय ध्वनि सीमा से अधिक शोर करने, अवैध भंडारण या बिना लाइसेंस बिक्री जैसे मामलों में अलग-अलग कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं।
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत जहां किसी उल्लंघन के लिए अलग दंड निर्धारित नहीं है, वहां 10 हजार रुपये से लेकर 15 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। उल्लंघन जारी रहने पर प्रत्येक दिन के लिए 10 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी हो सकता है।
वहीं, विस्फोटक अधिनियम के तहत लाइसेंस की शर्तों या संबंधित नियमों का उल्लंघन कर पटाखों का निर्माण, बिक्री, इस्तेमाल या भंडारण करने पर अलग कार्रवाई हो सकती है। उदाहरण के तौर पर, धारा 9बी में अवैध निर्माण के लिए तीन साल तक की जेल या पांच हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। नियमों के विरुद्ध विस्फोटक रखने, इस्तेमाल करने, बेचने या परिवहन करने पर दो साल तक की जेल या तीन हजार रुपये तक जुर्माना हो सकता है। मामले की परिस्थितियों के अनुसार दोनों सजाएं भी दी जा सकती हैं।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर तरह के पटाखा उल्लंघन पर एक ही जुर्माना या जेल की सजा लागू होती है।
पटाखे खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
पटाखे खरीदने के दौरान सिर्फ कीमत या आवाज देखकर फैसला न करें। पैकेट पर निर्माता, लाइसेंस और जरूरी प्रमाणन की जानकारी देखें। ग्रीन पटाखे के नाम पर बिकने वाले हर उत्पाद को सही न मानें। उसकी प्रमाणिकता और पैकेट पर दिए गए क्यूआर कोड की जांच करें।
अस्पतालों, स्कूलों, अदालतों और अन्य साइलेंस जोन के आसपास पटाखे न जलाएं। छोटे बच्चों को अकेले पटाखे न जलाने दें और जलते पटाखों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
दिवाली खुशियां बांटने का त्योहार है। थोड़ी सावधानी से इसे ऐसा बनाया जा सकता है कि आपकी खुशी किसी दूसरे की सेहत, नींद और सुकून पर भारी न पड़े।



