अंतरराष्ट्रीय

बर्दाश्त नहीं…लाल सागर में डूबा भारतीय झंडे वाला जहाज, भयंकर भड़का भारत, अब होगा एक्शन!

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लाल सागर में हर गुजरते दिन के साथ खतरा और बढ़ता जा रहा है। कभी मिसाइलें, कभी ड्रोन और कभी कारोबारी जहाजों पर हमले। दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में शामिल ये इलाका अब जंग के साए में जी रहा है और अब इस आग की चपेट में भारत के झंडे वाला एक जहाज भी आ गया है। लेकिन राहत की बात सिर्फ इतनी है कि सभी भारतीय नाविकों की जान बच गई। लेकिन इस हमले ने एक बार फिर दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। दरअसल लाल सागर में यमन के तट के पास भारत के झंडे वाले कारोबारी जहाज एमएसवी फैज नूर ओलिया प्रोजेक्टाइल हमले का शिकार हो गया। हमला इतना तेज था कि जहाज पलट गया और देखते ही देखते समुद्र में समा गया। उस वक्त जहाज पर 14 लोग सवार थे। जिनमें 13 भारतीय नाविक और एक यमन का नागरिक शामिल था। हादसे के तुरंत बाद यमन की कोस्ट गार्ड और नौसेना ने संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। वहीं हमले की खबर मिलते ही भारत सरकार हरकत में आ गई। विदेश मंत्रालय ने इस पूरे हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि भारतीय झंडा लगे कारोबारी जहाज को निशाना बनाया जाना बेहद गंभीर मामला है। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि राहत की बात यह है कि जहाज पर सवार सभी 13 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया।

भारत ने साफ कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों पर कारोबारी जहाजों को निशाना बनाना तुरंत बंद होना चाहिए और समुद्री व्यापार में किसी तरह की रुकावट स्वीकार नहीं की जा सकती। लेकिन यह मामला सिर्फ एक भारतीय जहाज पर हुए हमले का नहीं असली चिंता उस समुद्री गलियारे को लेकर है जहां पिछले कई दिनों से लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है। लाल सागर, बाबल मंडेप और होरमोज अब दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री इलाकों में बदल चुके हुती विद्रोहियों के मिसाइल और ड्रोन हमलों ने इस पूरे क्षेत्र को असुरक्षित बना दिया है। हाल ही में सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी के ऐलान के बाद हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए। आपको बता दें इस पूरे रास्ते से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल, गैस, कंटेनर, कारगो और रोजमर्रा का सामान गुजरता है। वहीं होमोस को दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की लाइफलाइन माना जाता है। ऐसे में इस इलाके में होने वाला हर हमला सिर्फ एक जहाज या एक देश की समस्या नहीं रहता। बल्कि उसका असर पूरी दुनिया के व्यापार, तेल की कीमतों और सप्लाई चेन पर पड़ता है।

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