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जंतर-मंतर पर सफाई कर्मचारियों का जोरदार प्रदर्शन: सेप्टिक टैंक से होने वाली मौतों पर फूटा गुस्सा, पुनर्वास कानून लागू करने की मांग

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देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर सफाई कर्मचारियों, उनके परिवारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने ‘हाथ से मैला उठाने वालों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013’ (Manual Scavengers Act, 2013) को देश भर में सख्ती से लागू करने की मांग की। प्रदर्शन में शामिल कई पीड़ित परिवार सिर पर “हमें मारना बंद करो” लिखी पट्टियां बांधकर पहुंचे थे, जो सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान अपनों को खोने का दर्द बयां कर रही थीं।

पिछले 35 सालों से इस आंदोलन से जुड़ीं 64 साल की दीप्ति सुकुमार ने कहा कि जब सरकार यह मानती है कि यह काम खतरनाक है और इसे करते हुए लोगों की मौत होती रहती है, तो ये सिर्फ़ मौतें नहीं हैं, बल्कि “सरकार की निगरानी में हत्या” के मामले हैं। अंबेडकर यूनिवर्सिटी में जाति और पेशे के मामलों के जानकार, 33 साल के एक PhD स्कॉलर ने कहा कि सरकार ने भले ही सफाई अभियानों पर बहुत ध्यान दिया हो, लेकिन सबसे ज़्यादा जोखिम वाले काम करने वाले मज़दूरों के पास अब भी ज़रूरी सुरक्षा नहीं है।

इस प्रदर्शन में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सिस्ट) की नेता वृंदा करात और सांसद मनोज कुमार झा भी शामिल हुए। करात ने कहा, “ये सफाई कर्मचारी जीवित रहते हुए तो किसी को दिखाई नहीं देते, लेकिन मरने के बाद सरकार उनके साथ ऐसा व्यवहार करती है जैसे वे कभी थे ही नहीं।”

जाति और सेप्टिक टैंक से जुड़ी मौतों के बीच संबंध की ओर ध्यान दिलाते हुए झा ने कहा कि सफाई कर्मचारी बहुत जोखिम भरे काम में लगे होते हैं और उन्हें बहुत कम सुरक्षा मिलती है, साथ ही इनमें से ज़्यादातर लोग हाशिए पर रहने वाले समुदायों से आते हैं।

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