रियाद से दगा, हूतियों से डर! क्या सऊदी अरब पर आये संकट में काम आएगा पाकिस्तान का ‘कागज़ी’ समर्थन? शहबाज़ शरीफ ने क्राउन प्रिंस से की बात

ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ सीधे सैन्य कार्रवाई से पीछे हटने के संकेतों के बाद पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ अपने कूटनीतिक रिश्तों को संभालने की कोशिशें तेज कर दी हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बात कर सऊदी अरब के नागरिक क्षेत्रों और आर्थिक बुनियादी ढांचे पर हुए हूती हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की।
मक्का रक्षा समझौते पर पाकिस्तान का स्पष्टीकरण
यह बातचीत तब हुई जब इस्लामाबाद ने यह साफ करने का प्रयास किया कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ का मतलब हूतियों के खिलाफ पाकिस्तानी सेना की स्वत: सैन्य भागीदारी नहीं है।
इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बयान दिया था कि यदि सऊदी अरब पर हूती हमले जारी रहते हैं, तो मक्का समझौता लागू हो सकता है। हालांकि, बाद में पाकिस्तान सरकार ने रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि यह समझौता मुख्य रूप से रक्षात्मक (Defensive) है और इसके तहत पाकिस्तानी सेना को किसी आक्रामक सैन्य अभियान में शामिल होने की बाध्यता नहीं है।
रविवार को फ़ोन पर हुई बातचीत के दौरान, शरीफ़ ने सऊदी नेतृत्व और वहां के लोगों के साथ पाकिस्तान के “पूरे समर्थन” की बात कही। उन्होंने कहा कि हूति हमले क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा हैं और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति में और बाधा आ सकती है।



