Kajal Dhochak भारी वजन वर्ग में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं

भारतीय महिला पहलवान काजल धोचक ने 18 साल की उम्र में उन्होंने कुश्ती विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। कजाकिस्तान के अस्ताना में पिछले बुधवार को 76 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में पहुंचकर काजल ने यह उपलब्धि हासिल की। वह इस प्रतियोगिता के भारी वजन वर्ग में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गई हैं।
काजल की इस सफलता के पीछे एक ऐसी हार भी है, जिसने उन्हें कुछ समय के लिए निराश कर दिया था। करीब 5 महीने पहले वह एशियाई खेलों के चयन मुकाबले में हार गई थीं। फाइनल में वह प्रिय मलिक के खिलाफ बढ़त बनाए हुए थीं, लेकिन आखिरी कुछ सेकंड में मुकाबला उनके हाथ से निकल गया। इस हार के कारण वह कई दिनों तक परेशान रहीं। उन्हें उम्मीद थी कि जीत मिलने पर वह अपने चाचा को गले लगाएंगी और एशियाई खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका हासिल करेंगी।
एक ऑनलाइन बातचीत में जेएसडब्ल्यू से जुड़ी काजल ने बताया कि इस हार का दर्द उन्हें कई दिनों तक रहा। एशियाई खेल हर 4 साल में एक बार होते हैं, इसलिए यह मौका उनके लिए बेहद खास था। हालांकि, कुछ दिनों बाद उन्होंने खुद को संभाला और सीनियर विश्व चैंपियनशिप की तैयारी में जुट गईं। उनका कहना है कि अब एशियाई खेलों के चयन में मिली हार का दर्द काफी हद तक खत्म हो चुका है।
विश्व चैंपियनशिप के लिए जगह पक्की होने के बाद काजल का लक्ष्य केवल पदक जीतना नहीं, बल्कि खिताब हासिल करना था। उन्होंने बताया कि वह मन बना चुकी थीं कि इस बार चैंपियन बनकर लौटना है। फाइनल में उनका सामना ऐसी पहलवान से हुआ, जिसे वह पहले प्रो रेसलिंग लीग में हरा चुकी थीं। लेकिन इस बार मुकाबले के आखिरी पलों में प्रतिद्वंद्वी ने अंक हासिल कर लिए और काजल को वापसी का मौका नहीं मिला। उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
इसके बावजूद काजल की यह उपलब्धि भारतीय कुश्ती के लिए खास है। यह विश्व चैंपियनशिप के इतिहास में भारत का तीसरा रजत पदक है और भारी वजन वर्ग में देश का पहला पदक भी है। काजल को भरोसा है कि इस अनुभव से उन्हें आगे और बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिलेगी। उनका लक्ष्य अगले साल ओलंपिक के लिए जगह पक्की करना है। उनका मानना है कि दुनिया की शीर्ष पहलवानों के खिलाफ मुकाबला करने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है।
सीनियर स्तर पर काजल का यह पहला साल है। 18 साल की होने के बाद उन्होंने अंडर-20, अंडर-23 और सीनियर स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और हर स्तर पर अपनी छाप छोड़ी है। सीनियर विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक के अलावा उन्होंने अंडर-20 विश्व चैंपियनशिप में अपना खिताब बचाया और अंडर-23 एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता।
काजल का कहना है कि लगातार अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में खेलने से उनका डर और घबराहट कम हुई है। पहले कम प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के कारण मुकाबले से पहले दबाव महसूस होता था, लेकिन अब उन्हें हर मुकाबला सामान्य लगता है। वह इस साल अंडर-20 राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप के चयन मुकाबलों और दिसंबर में होने वाली सीनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में हिस्सा लेने की तैयारी कर रही हैं।
काजल ने अपनी कमजोरियों को भी पहचाना है। उनके मुताबिक, मुकाबले के दौरान वह कई बार जरूरत से ज्यादा आक्रामक हो जाती हैं। ट्रेनर ने उन्हें शांत रहकर खेलने की सलाह दी है। इसके साथ ही उन्हें अपनी रक्षात्मक तकनीक पर भी काम करना है। काजल का कहना है कि अब वह मुकाबले के आखिरी पलों में भी पीछे हटने के बजाय आक्रमण जारी रखेंगी। विश्व चैंपियनशिप के पदक ने उनके हौसले को बढ़ाया है और अब उनकी नजरें देश के लिए ओलंपिक पदक जीतने पर टिकी हुई हैं।



