उत्तर प्रदेश

केजीएमयू धर्मांतरण कांड : इस्लामिक मेडिकोज ग्रुप में शेयर होती थीं महिला डॉक्टरों की निजी तस्वीरें

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किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में हुई जांच में ये भी बात सामने आई है कि चिकित्सा संस्थानों में सक्रिय सिंडिकेट ”इस्लामिक मेडिकोज” नामक व्हाट्सएप ग्रुप पर नेटवर्क संचालित कर रहा था। इस ग्रुप पर जाल में फंसाई गई गैर-मुस्लिम महिला डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की निजी तस्वीरें व वीडियो साझा कर उन्हें ब्लैकमेल किया जाता था।

चिकित्सा संस्थानों में ये संदिग्ध सिंडिकेट शुरू में इस्लामिक स्टूडेंट ग्रुप के नाम से संचालित हो रहा था। बाद में इसका नाम इस्लामिक मेडिकल ग्रुप और अंत में इस्लामिक मेडिकोज व्हाट्सएप ग्रुप कर दिया गया। यह आधिकारिक रूप से प्रमाणित हुआ है कि इस पूरे डिजिटल नेटवर्क की उत्पत्ति आगरा के सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज से हुई थी, जो धीरे-धीरे केजीएमयू सहित सूबे के अन्य बड़े चिकित्सा संस्थानों में फैल गया। यह मूल रूप से विशिष्ट डॉक्टरों, रेजिडेंट डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और मेडिकल छात्रों का एक बंद सोशल मीडिया नेटवर्क था, जिसका उपयोग सामान्य चिकित्सा चर्चाओं के बजाय परिसर के भीतर कट्टरपंथी और मजहबी एजेंडे को गुप्त रूप से आगे बढ़ाने के लिए किया जाता था।

इस ग्रुप की सुनियोजित कार्यप्रणाली के तहत, सिंडिकेट के वरिष्ठ सदस्य जूनियर छात्रों को प्रेरित कर परिसर में गैर-मुस्लिम (विशेषकर हिंदू) महिला डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को टार्गेट करते थे। प्रेमजाल और शादी का झूठा झांसा देकर युवतियों को फंसाया जाता था और बाद में उनकी निजी तस्वीरों व वीडियो को ग्रुप में साझा कर उन पर अवैध रूप से इस्लाम कबूल करने (धर्मांतरण) का तीव्र दबाव बनाया जाता था।

इसी ग्रुप से बुलाया जाता था इस्लामिक मेडिकोज मीट

इस डिजिटल सिंडिकेट के माध्यम से केवल सोशल मीडिया पर ही नहीं, बल्कि मेडिकल परिसरों के भीतर गुप्त बैठकें (इस्लामिक मेडिकोज मीट) भी आयोजित की जाती थीं। इसमें चोरी-छिपे बाहरी मौलानाओं को बुलाकर तकरीरें कराना और जाकिर नाइक जैसी प्रतिबंधित कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देकर छात्रों का ब्रेनवॉश करने का काम किया जाता था। सबसे गंभीर शासकीय व प्रशासनिक बिंदु यह सामने आया है कि इस नेटवर्क को केजीएमयू सहित अन्य संस्थानों के कुछ वरिष्ठ प्रोफेसरों और विभागाध्यक्षों का सीधा आंतरिक संरक्षण प्राप्त था।

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