पंजाब

Punjab में High Court का आदेश बेअसर, 7.5 लाख कर्मचारियों के DA पर क्यों कुंडली मारे बैठी सरकार?

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पंजाब सरकार के नियमित कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ता एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। कर्मचारी यूनियनों की लगातार मांग और अदालत के पक्ष में फैसले के बावजूद, राज्य सरकार ने अभी तक उनके लंबे समय से रुके हुए डीए को जारी नहीं किया है। इस पूरे मामले में एक बड़ी असमानता यह है कि पंजाब में तैनात आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को केंद्र सरकार के नियमों के तहत बढ़ा हुआ डीए मिल रहा है, जबकि राज्य के करीब 3.5 लाख कर्मचारियों और 4 लाख से अधिक पेंशनभोगियों को इससे वंचित रखा गया है। साल 2026 में आए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले से यह साफ हुआ था कि इस राहत से राज्य के 7.5 लाख से ज्यादा परिवारों को सीधा फायदा मिल सकता है।

मध्यमवर्गीय परिवार के लिए सिर्फ सैलरी नहीं, जीने का सहारा है डीए

एक मिडिल क्लास सरकारी कर्मचारी के लिए महंगाई भत्ता केवल सैलरी स्लिप पर लिखा एक नंबर नहीं होता, बल्कि यह उसके घर का बजट बिगड़ने से बचाने वाला एक मजबूत सहारा है। इसी पैसे से बच्चों की स्कूल फीस भरी जाती है, बुजुर्ग माता-पिता के लिए दवाइयां आती हैं, रसोई का खर्च चलता है और होम लोन की ईएमआई चुकाई जाती है। जब भी डीए मिलने में देरी होती है, तो उसका सीधा असर आम आदमी की रसोई और उनके बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है। महंगाई किसी सरकारी फाइल या खजाने के भरने का इंतजार नहीं करती, बिजली के बिल और दवाइयों के दाम हर दिन बढ़ रहे हैं।

 

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