Bhagwant Mann के Viral Video पर महाविवाद, Akal Takht के फैसले के खिलाफ हुई Punjab सरकार

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान एक वीडियो को लेकर बड़े विवाद में फंस गए हैं। सोशल मीडिया पर फैले इस वीडियो में एक आदमी सिख गुरुओं और पूजनीय हस्तियों की तस्वीरों के सामने हाथ में शराब का गिलास लिए दिख रहा है। लोगों का आरोप है कि शराब के छींटे इन पवित्र तस्वीरों पर भी पड़े। इस बात से सिख संगठन और विरोधी पार्टियां बहुत नाराज हैं। उनका कहना है कि यह सिख गुरुओं का बड़ा अपमान है, क्योंकि सिख धर्म में पवित्र जगहों या धार्मिक तस्वीरों के पास शराब रखना बिल्कुल गलत माना जाता है।
अकाल तख्त का बड़ा फैसला
यह मामला सिख समुदाय की सबसे बड़ी धार्मिक संस्था ‘अकाल तख्त’ के पास पहुंचा। वहां पांच सदस्यों की कमेटी ने इस मामले की जांच की। सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या यह वीडियो सचमुच असली है और इसमें दिख रहा व्यक्ति भगवंत मान ही है? भगवंत मान ने कहा कि यह वीडियो असली नहीं है और इसे कंप्यूटर की मदद से बनाया गया है। लेकिन अकाल तख्त ने उनके इस दावे को गलत बताया। संस्था ने वीडियो को असली मानते हुए भगवंत मान को ‘गुरु दोखी’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित कर दिया।
अकाल तख्त का बड़ा फैसला
यह मामला सिख समुदाय की सबसे बड़ी धार्मिक संस्था ‘अकाल तख्त’ के पास पहुंचा। वहां पांच सदस्यों की कमेटी ने इस मामले की जांच की। सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या यह वीडियो सचमुच असली है और इसमें दिख रहा व्यक्ति भगवंत मान ही है? भगवंत मान ने कहा कि यह वीडियो असली नहीं है और इसे कंप्यूटर की मदद से बनाया गया है। लेकिन अकाल तख्त ने उनके इस दावे को गलत बताया। संस्था ने वीडियो को असली मानते हुए भगवंत मान को ‘गुरु दोखी’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित कर दिया।
अकाल तख्त के फैसले के बाद पंजाब सरकार ने कुछ जांच रिपोर्ट दिखाईं। सरकार ने दावा किया कि इन रिपोर्टों के मुताबिक वीडियो नकली है और इसमें दिख रहा आदमी मुख्यमंत्री नहीं है। आम आदमी पार्टी ने भी इस आधार पर अकाल तख्त के फैसले को मानने से इनकार कर दिया। लेकिन बाद में पुलिस जांच में पता चला कि पंजाब सरकार ने जो रिपोर्ट पेश की थीं, वे खुद नकली थीं। जिन लैब के नाम पर वे रिपोर्ट बनी थीं, उनका कोई अता-पता ही नहीं था।
पुलिस की कार्रवाई और नए दावे
इस मामले में गुरुग्राम पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है और नकली रिपोर्ट बनाने के आरोप में कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया है। शक है कि इसमें पंजाब पुलिस के कुछ लोग भी शामिल हो सकते हैं। इस बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान के बयान भी बदलते रहे। पहले उन्होंने इसे AI से बना वीडियो बताया, तो बाद में कहा कि वीडियो में दिख रहा आदमी कोई और है, जिसने उनके जैसा दिखने वाला मुखौटा पहन रखा था। अब सरकार पर जनता और धार्मिक संस्थाओं को धोखा देने के आरोप लग रहे हैं।
पंजाब का नया और सख्त कानून
यह विवाद इसलिए भी बहुत बड़ा हो गया है क्योंकि पंजाब सरकार ने हाल ही में धार्मिक अपमान को रोकने के लिए एक बहुत सख्त कानून पास किया है। पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने इस नए कानून को मंजूरी दे दी है। इसके तहत गुरु ग्रंथ साहिब का अपमान करने या इसकी साजिश रचने पर 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा और 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का नियम है।
कानून और राजनीति के बीच फंसा मामला
अब विरोधी दल यह सवाल उठा रहे हैं कि जब सरकार ने इतना सख्त कानून बनाया है, तो क्या मुख्यमंत्री पर आरोप साबित होने पर उनके खिलाफ भी यही कार्रवाई होगी? कानूनी तौर पर यह मामला थोड़ा उलझा हुआ है, क्योंकि यह नया कानून मुख्य रूप से गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान पर लागू होता है, तस्वीरों के अपमान पर नहीं। साथ ही, कोई भी कार्रवाई करने से पहले कानूनी रूप से यह साबित करना होगा कि वीडियो में दिख रहा आदमी सचमुच मुख्यमंत्री ही है। राजनीति में अब इस बात पर बहस छिड़ी है कि क्या यह कानून सिर्फ आम जनता के लिए है या बड़े नेताओं पर भी लागू होगा।



