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Ind-NZ FTA: भारत-न्यूजीलैंड ने मुक्त व्यापार समझौते पर किए हस्ताक्षर, कई सामानों पर ड्यूटी घटकर हुई जीरो

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प्रमुख उद्योग संगठन एसोचैम ने सोमवार को भारत-न्यूजीलैंड व्यापार परिषद (आईएनजेडबीसी) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत उद्योगों से जुड़े कदमों को व्यवस्थित रूप से लागू करना और दोनों देशों के व्यवसायों को इस समझौते से मिलने वाले अवसरों का पूरा लाभ दिलाना है।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत और न्यूजीलैंड के बीच साझेदारी की पूरी क्षमता को हासिल करने के लिए बेहतर कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करना बहुत महत्वपूर्ण होगा। उद्योग संगठन ने कहा कि व्यापार और उद्योग संस्थाओं के बीच बढ़ता सहयोग दोनों देशों के बीच व्यापार को आसान बनाएगा और प्रक्रियाओं में आने वाली बाधाओं को कम करेगा। साथ ही, बेहतर हवाई संपर्क और पर्यटन सहयोग आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करेगा।

22 दिसंबर 2025 को सिर्फ नौ महीनों में पूरा हुआ यह एफटीए और सोमवार को हस्ताक्षरित समझौता, दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का व्यापार लगभग 1.3 अरब डॉलर और सेवाओं का व्यापार 634 मिलियन डॉलर है, जिसे अगले पांच वर्षों में 5 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। न्यूजीलैंड में लगभग 3 लाख भारतीयों का समुदाय इस साझेदारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

बयान में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर व्यापार में अनिश्चितता और सप्लाई चेन में बदलाव के बीच यह समझौता इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की रणनीतिक विविधता और मजबूत, समावेशी तथा भविष्य के लिए तैयार आर्थिक साझेदारी बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। न्यूजीलैंड के साथ एफटीए से व्यापार और निवेश की नई संभावनाएं खुल रही हैं। इसके तहत भारत के निर्यात को न्यूजीलैंड में 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जो भारत के एफटीए इतिहास में एक नया अध्याय है।

इसके साथ ही अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश का भी वादा किया गया है, जो दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी को और पक्का करेगा। एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने कहा कि इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ने की उम्मीद है। भारत से टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोलियम उत्पाद और मशीनरी का निर्यात बढ़ेगा, जबकि न्यूजीलैंड से कच्चा माल और अन्य जरूरी वस्तुएं आयात होंगी। उन्होंने यह भी बताया कि भारत का सेवा क्षेत्र, खासकर आईटी, वित्तीय सेवाएं, शिक्षा, बिजनेस सेवाएं और अन्य पेशेवर सेवाएं, न्यूजीलैंड में अपनी पहुंच बढ़ाकर खास फायदा उठा सकते हैं।

भारत-न्यूजीलैंड FTA की मुख्य बातें

भारत-न्यूजीलैंड व्यापार समझौते के लिए बातचीत असल में 2010 में शुरू हुई थी। चर्चा के नौ दौर के बाद, 2015 में बातचीत रोक दी गई थी। इसके बाद, मार्च 2025 में फिर से बात शुरू हुई। जो इस प्रक्रिया की एक नई शुरुआत थी। बातचीत के सफल नतीजे का एलान 22 दिसंबर 2025 को किया गया।

इस समझौते में 20 अध्याय हैं, जिनमें चीजों का व्यापार, मूल के नियम, सेवाएं, सीमा शुल्क प्रक्रियाएं और व्यापार में आसानी, स्वच्छता और व्यापार में तकनीकी रुकावटें, व्यापार उपचार, विवाद समाधान और कानूनी ढांचे जैसे मुख्य क्षेत्र शामिल हैं। भारत के लिए, यह समझौता काफी फायदेमंद हो सकता है।

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