उत्तर प्रदेश

डेढ़ दशक के लिव-इन संबंध, फिर ब्रेकअप : क्या यह दुष्कर्म का मामला है? सुप्रीम कोर्ट ने उठाये सवाल, मध्यस्थता का दिया सुझाव

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 उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण सवाल उठाते हुए कहा कि क्या 15 साल लंबे लिव-इन रिलेशनशिप के टूटने को दुष्कर्म का मामला माना जा सकता है, खासकर तब जब जोड़े का एक बच्चा भी हो और पुरुष संबंध तोड़कर अलग हो गया हो। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ एक महिला की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने 15 साल के लिव-इन रिलेशनशिप के बाद शादी के वादे से मुकरने पर एक व्यक्ति पर यौन शोषण का आरोप लगाया था।

अदालत ने इस बात पर संदेह जताया कि क्या ऐसी परिस्थितियों में आपराधिक मामला बनता है। पीठ ने टिप्पणी की कि कई वर्षों तक चले आपसी सहमति के संबंधों को ब्रेकअप के बाद आपराधिक मामले में नहीं बदला जा सकता। अदालत ने स्पष्ट रूप से पूछा कि क्या किसी पुरुष का ऐसे रिश्ते से बाहर निकलना अपने आप में एक अपराध माना जाएगा?

याचिकाकर्ता महिला ने बताया कि जब वह आरोपी से मिली थी, तब वह 18 साल की विधवा थी। आरोपी ने उससे शादी का वादा किया था, जिसके भरोसे उसने डेढ़ दशक तक उसके साथ जीवन बिताया और उनका एक बच्चा भी हुआ। महिला का आरोप है कि बाद में उसे पता चला कि वह व्यक्ति पहले से शादीशुदा था और उसके अन्य महिलाओं के साथ भी संबंध थे। अदालत ने रिश्ते की लंबी अवधि, उसकी प्रकृति और शिकायत दर्ज करने में हुई देरी (रिश्ते में आने के 15 साल बाद) पर गंभीर कानूनी चिंताएं जतायीं।

पीठ ने कहा कि भले ही याचिकाकर्ता की स्थिति सहानुभूति पैदा कर सकती है, लेकिन अपराध के तत्वों को स्पष्ट रूप से स्थापित किये बिना आपराधिक कानून का सहारा नहीं लिया जा सकता। अदालत ने इस मामले के दायरे को अन्य महिलाओं से जुड़े आरोपों तक बढ़ाने से भी इनकार कर दिया। अदालत ने सुझाव दिया कि महिला बच्चे के भरण-पोषण सहित अन्य कानूनी उपचारों का विकल्प चुन सकती है, लेकिन आपराधिक मुकदमा चलाने के लिए एक स्पष्ट कानूनी आधार होना आवश्यक है। इसके बाद शीर्ष अदालत ने इस विवाद को मध्यस्थता के लिए भेज दिया।

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