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लिकटेंस्टाइन के प्रिंस एलॉइस ने पीएम मोदी से की मुलाकात, भारत के साथ रिश्ते मजबूत करने पर हुई चर्चा

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को लिकटेंस्टाइन के युवराज एलोइस के साथ दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने और द्विपक्षीय साझेदारी को गति देने के मुद्दे पर बातचीत की। लिकटेंस्टाइन के युवराज एलोइस 25 से 28 अक्टूबर तक भारत की यात्रा पर हैं। इस यात्रा का उद्देश्य व्यापार एवं निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देना है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने जारी किया बयान

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक पोस्ट में कहा, “हमारी द्विपक्षीय साझेदारी को और गति देते हुए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज हैदराबाद हाउस में लिकटेंस्टाइन के युवराज एलोइस और राजकुमारी सोफी का गर्मजोशी से स्वागत किया। बातचीत का उद्देश्य हमारे संबंधों को और मजबूत करना है।”

पीएम मोदी ने किया युवराज एलोइस और राजकुमारी सोफी का स्वागत

युवराज एलोइस इस साल दूसरी बार भारत आए हैं। इससे पहले वह फरवरी में कृत्रिम मेधा (एआई) प्रभाव शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नयी दिल्ली आए थे। वह 2010 और 2018 में भी भारत की यात्रा कर चुके हैं। इससे पहले दिन में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लिकटेंस्टाइन के युवराज एलोइस से मुलाकात की। जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत और लिकटेंस्टाइन के बीच द्विपक्षीय साझेदारी कई क्षेत्रों में मजबूत गति से आगे बढ़ रही है। इसमें भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) से पैदा हुए अवसरों की अहम भूमिका है।

एस. जयशंकर से भी हुई मुलाकात, व्यापार समझौते पर जोर

आज बाद में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ उनकी बैठक का इंतजार है, जिससे हमारा सहयोग आगे बढ़ेगा।” भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के बीच व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) पर करीब 16 साल की बातचीत के बाद मार्च 2024 में हस्ताक्षर किए गए थे। यह समझौता पिछले साल अक्टूबर में लागू हुआ।

100 अरब डॉलर के निवेश की योजना से बढ़ेंगी संभावनाएं

इस व्यापक व्यापार समझौते के तहत ईएफटीए के सदस्य देशों आइसलैंड, लिकटेंस्टाइन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करने की योजना बनाई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक अलग पोस्ट में राष्ट्रपति भवन में आयोजित औपचारिक स्वागत समारोह की तस्वीरें साझा कीं। इससे भारत में निवेश, रोजगार सृजन, व्यापार विस्तार और तकनीकी सहयोग के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। भारत और लिकटेंस्टाइन के बीच बढ़ता सहयोग इसी व्यापक आर्थिक साझेदारी का अहम हिस्सा है।

राष्ट्रपति भवन में स्वागत, राजघाट पहुंचकर गांधीजी को दी श्रद्धांजलि

भारत यात्रा के दौरान युवराज एलोइस का राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत भी किया गया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस समारोह की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि यह यात्रा दोनों देशों की द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने और सहयोग के नए रास्ते तलाशने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है। जायसवाल ने कहा, “यह यात्रा भारत और लिकटेंस्टाइन की, द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने और सहयोग के नए रास्ते तलाशने की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।” लिकटेंस्टाइन के युवराज एलोइस ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी दी। जायसवाल ने एक अन्य पोस्ट में कहा, “गांधीजी की अहिंसा और शांति की स्थायी विरासत आज भी पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है।

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