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‘मोदी लहर’ में नहीं जीती, तो अब कैसे? Arvind Kejriwal ने BJP की जीत पर उठाए बड़े सवाल

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दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा की जीत पर सवाल उठाए हैं। यह जीत पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है, क्योंकि वह लंबे समय से इस राज्य में हाशिए पर रही है, जहां वर्षों से कांग्रेस, वामपंथी दलों और बाद में तृणमूल कांग्रेस का दबदबा रहा है। केजरीवाल ने सवाल उठाया कि भाजपा ने बंगाल में कैसे प्रवेश किया, और इस बात पर जोर दिया कि यह ऐसे समय में हुआ जब मोदी की लोकप्रियता राज्यों में गिर रही थी।

X पर केजरीवाल ने लिखा कि दिल्ली और बंगाल, जहां भाजपा ‘मोदी लहर’ के चरम पर भी जीत हासिल नहीं कर सकी… 2015 में दिल्ली में और 2016 में बंगाल में, उन्हें सिर्फ 3-3 सीटें मिलीं। उसी दिल्ली और बंगाल में भाजपा ने तब जीत हासिल की जब पूरे देश में मोदीजी की लोकप्रियता बिल्कुल निचले स्तर पर गिर रही थी… कैसे? वहीं, एक रैली में केजरीवाल में कहा कि आज पूरे देश में एक बड़ा संकट मंडरा रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने जिस तरह से लोकतंत्र का अपहरण और गला घोंटा है। पिछले तीन-चार महीनों से हम बंगाल में अराजकता को अपनी आँखों से देख रहे हैं। उन्होंने बिहार और महाराष्ट्र में भी यही किया।

केजरीवाल ने कहा कि मेरी विधानसभा में, मेरे जेल जाने से पहले, 1,48,000 वोट थे। जब मैं लौटा, तो केवल 1,06,000 वोट बचे थे। उन्होंने छह महीनों के भीतर 42,000 वोट कम कर दिए। पिछली बार मैं 30,000 वोटों से जीता था। 42,000 वोट रद्द कर दिए गए। मैं 3,000 वोटों से हार गया। आप कैसे जीत सकते हैं? जब आप सारे वोट रद्द कर देंगे, तो कुछ भी नहीं बचेगा। यही अराजकता पूरे देश में चल रही है। आज लोकतंत्र संकट में है।

आम आदमी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रीय राजधानी में राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात के लिए रवाना हो गया है ताकि आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के हाल ही में भाजपा में “विलय” का मुद्दा उठाया जा सके, जिनमें राघव चड्ढा, हरभजन सिंह, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल जैसे नेता शामिल हैं।

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