भारत के पैरा खिलाड़ियों का जलवा, रिंकू-अजीत ने भाला फेंक में जीते गोल्ड-सिल्वर, सीएम योगी ने दी बधाई

नागोया। एशियाई पैरा खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का मान बढ़ाया है। पुरुषों की भाला फेंक एफ46 स्पर्धा में रिंकू ने स्वर्ण पदक जीतकर तिरंगे का गौरव बढ़ाया, जबकि अजीत सिंह ने रजत पदक अपने नाम किया। वहीं, महिलाओं की 1500 मीटर टी12-टी13 स्पर्धा में सौम्या ने स्वर्ण और राधा वेंकटेश ने रजत पदक जीतकर भारत की पदक तालिका में चमक बिखेरी। खिलाड़ियों की इस उपलब्धि से खेल प्रेमियों में खुशी की लहर है।
सीएम योगी ने बधाई
एशियाई पैरा खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुशी जताते हुए पदक विजेताओं को बधाई दी। एशियाई पैरा गेम्स-2026 में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पदक विजेताओं को बधाई दी। पुरुषों की भाला फेंक एफ46 स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले उत्तर प्रदेश के पैरा-एथलेटिक्स खिलाड़ी अजीत सिंह की उपलब्धि पर मुख्यमंत्री ने उनकी मेहनत, इच्छाशक्ति और संकल्प की सराहना की।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अजीत सिंह को बधाई देते हुए कहा, “यह उपलब्धि आपकी अदम्य इच्छाशक्ति, अथक परिश्रम और अटूट संकल्प का प्रतीक है। आपने अपने असाधारण प्रदर्शन से देश और उत्तर प्रदेश का नाम रोशन किया है। आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए अनंत शुभकामनाएं। भारतीय खिलाड़ियों की इन उपलब्धियों से देश में खुशी का माहौल है। पैरा-एथलीटों ने अपने प्रदर्शन से साबित किया है कि मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है।
महज 9 सेंटीमीटर के अंतर से हुआ गोल्ड-सिल्वर का फैसला
पुरुषों की भाला फेंक एफ46 स्पर्धा में रिंकू और अजीत सिंह के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। रिंकू ने 65.11 मीटर भाला फेंककर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया, जबकि अजीत सिंह ने 65.02 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक हासिल किया। दोनों खिलाड़ियों के प्रदर्शन के बीच महज नौ सेंटीमीटर का अंतर रहा। इंडोनेशिया के आर सत्योनो ने 55.30 मीटर भाला फेंककर कांस्य पदक जीता। रिंकू और अजीत की इस उपलब्धि ने साबित कर दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और निरंतर अभ्यास से अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। दोनों खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर भारत के पैरा-एथलेटिक्स की ताकत का प्रदर्शन किया।
सौम्या ने दौड़ में मारी बाजी, राधा को मिला रजत
महिलाओं की 1500 मीटर टी12-टी13 स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा रहा। सौम्या ने पांच मिनट 12.39 सेकेंड में दौड़ पूरी कर स्वर्ण पदक जीता। वहीं, राधा वेंकटेश ने पांच मिनट 30.90 सेकेंड का समय निकालकर रजत पदक अपने नाम किया। जापान की माना सासाकी तीसरे स्थान पर रहीं। इस स्पर्धा में दृष्टिबाधित खिलाड़ियों ने अपने गाइड की मदद से दौड़ पूरी की। सौम्या के साथ कुमार भरत ने गाइड की भूमिका निभाई, जबकि राधा वेंकटेश के साथ गोविंद सोलंकी रहे। खिलाड़ियों और उनके गाइड के बीच तालमेल ने इस स्पर्धा को खास बना दिया।
क्या हैं एफ46 और टी11-टी13 वर्ग?
पैरा-एथलेटिक्स में खिलाड़ियों को उनकी शारीरिक अक्षमता और दृष्टि संबंधी स्थिति के आधार पर अलग-अलग वर्गों में प्रतिस्पर्धा करने का अवसर दिया जाता है।
एफ46 वर्ग: इसमें हाथ या बांह से संबंधित निर्धारित शारीरिक अक्षमता वाले खिलाड़ी भाला फेंक जैसी फील्ड स्पर्धाओं में हिस्सा लेते हैं।
टी11 वर्ग: इसमें ऐसे दृष्टिबाधित खिलाड़ी शामिल होते हैं, जिन्हें दृष्टि बहुत कम होती है या बिल्कुल नहीं होती।
टी12 वर्ग: इसमें टी11 और टी13 के बीच की दृष्टि संबंधी अक्षमता वाले खिलाड़ी आते हैं।
टी13 वर्ग: इसमें गंभीर दृष्टिबाधिता वाले खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा करते हैं।
भारतीय खिलाड़ियों की इन उपलब्धियों ने एशियाई पैरा खेलों में देश की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। रिंकू, अजीत, सौम्या और राधा के पदक न केवल उनकी व्यक्तिगत मेहनत का परिणाम हैं, बल्कि देश के उभरते पैरा-खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा भी हैं।



