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राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर मोदी-योगी की चुप्पी क्यों? कांग्रेस ने उठाए सवाल, SC की निगरानी में जांच की मांग

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अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला एक बार फिर राजनीतिक तूल पकड़ता नजर आ रहा है। कांग्रेस ने सोमवार को इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को घेरते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चुप्पी पर सवाल उठाए।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मांग की कि मामले की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराई जाए। उन्होंने मंदिर को मिले चढ़ावे का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की भी मांग की।

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला सार्वजनिक होने के साढ़े चार महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने इस पर कुछ नहीं कहा है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए लिखा, “राम नाम से सत्ता पाई, चंदा चोरी पर चुप्पी छाई।” कांग्रेस नेता ने कहा कि देश के नागरिकों की जिम्मेदारी है कि वे सत्ता के अहंकार में डूबे लोगों को दंडित करें।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच पर उठाए सवाल

कांग्रेस महासचिव ने दावा किया कि अयोध्या के राम मंदिर में कथित चोरी का मामला चार जून को सार्वजनिक हुआ था। इसके बाद राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। रमेश के मुताबिक, गृह विभाग ने 17 अगस्त को एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंपी, जिसमें ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दी गई। रमेश ने सवाल उठाया कि जिस संस्था से जुड़े लोगों पर सवाल उठ रहे थे, उसी के अनुरोध पर जांच क्यों शुरू की गई और क्या जांच पूरी तरह स्वतंत्र थी? उन्होंने जांच की प्रक्रिया और निष्कर्षों को लेकर भी सवाल खड़े किए।

सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कांग्रेस ने किया दावा

जयराम रमेश ने दावा किया कि 27 अप्रैल से पांच जून के बीच के सीसीटीवी फुटेज में गिनती से जुड़े कर्मचारी कथित तौर पर नोटों की गड्डियां छिपाते हुए 105 बार दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि मंदिर के खजाने की जिम्मेदारी कोषाध्यक्ष की थी और अयोध्या के कुछ संतों ने भी इस संबंध में सवाल उठाए थे।

कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि सात जुलाई को कोषाध्यक्ष गोविंद गिरि ने चंपत राय की इस मामले में किसी भूमिका से इनकार किया था। रमेश ने सवाल किया कि कथित चोरी में कितनी धनराशि या कितना कीमती सामान गायब हुआ, इसका पूरा आंकड़ा अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया।

प्राथमिकी और गिरफ्तारियों को लेकर भी सवाल

कांग्रेस महासचिव के अनुसार, 23 जून की प्रारंभिक रिपोर्ट में निगरानी संबंधी नियमों के लागू नहीं होने और कंट्रोल रूम के कई बार खाली रहने की बात सामने आई थी। उन्होंने सवाल किया कि जब निगरानी व्यवस्था को लेकर ऐसी बातें सामने आईं, तो जिम्मेदार लोगों और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की विस्तृत जांच किए बिना मामला कैसे बंद किया जा सकता है।

रमेश ने दावा किया कि 25 जून को प्राथमिकी दर्ज की गई और अगले दिन गिनती से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि प्राथमिकी में ट्रस्ट के किसी पूर्व पदाधिकारी का नाम क्यों नहीं था। कांग्रेस नेता ने मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) या केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच नहीं कराए जाने पर भी सवाल उठाए।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग

जयराम रमेश ने मांग की कि राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के पूरे मामले की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि मंदिर को मिले चढ़ावे का पूरा हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए और मामले में सभी जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच की जानी चाहिए। कांग्रेस नेता ने भाजपा पर राजनीतिक हमला करते हुए अयोध्या में पार्टी की चुनावी हार का भी उल्लेख किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार से संघ परिवार से जुड़े लोगों के खिलाफ निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। हालांकि, कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों और जांच प्रक्रिया पर उठाए गए सवालों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। कथित चोरी, संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और जांच के निष्कर्षों के संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए आधिकारिक दस्तावेजों और जांच एजेंसियों के निष्कर्षों का संदर्भ आवश्यक है।

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