लखनऊ में यह कैसा इलाज: पेट में दर्द आज, कारण का पता चलेगा डेढ़ माह बाद

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का खामियाजा दूर-दराज से आने वाले बेबस मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। अस्पताल की न्यू ओपीडी और क्वीनमेरी ओपीडी में आने वाले मरीजों को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए एक से डेढ़ महीने बाद की तारीख दी जा रही है। ऐसे में समय पर इलाज न मिलने से मरीज पेट दर्द और अन्य गंभीर समस्याओं से तड़पने को मजबूर हैं। सिस्टम की नाकामी के चलते मजबूरी में निजी केंद्रों से जांच कराने को मजबूर हो रहे हैं।
बाराबंकी के मसौली निवासी 23 वर्षीय लवकेश कुमार असहनीय पेट दर्द से पीड़ित हैं। जिले में राहत न मिलने पर उन्होंने 14 सितंबर को केजीएमयू के गैस्ट्रोलॉजी विभाग में दिखाया। डॉक्टर ने तुरंत अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी, लेकिन जब लवकेश काउंटर पर पहुंचे तो उन्हें 22 अक्टूबर यानी 38 दिन बाद की तारीख थमा दी गई। लवकेश का कहना है कि इतने लंबे इंतजार में उनकी जान पर बन सकती है। इसी तरह काकोरी की 65 वर्षीय मीरा तिवारी ने 14 सितंबर को क्वीनमेरी ओपीडी में डॉक्टर को दिखाया था। उन्हें अल्ट्रासाउंड के लिए 30 अक्टूबर की तारीख दी गई है।
भर्ती मरीजों को भी राहत नहीं
अस्पताल के वार्डों में भर्ती गंभीर मरीजों के साथ भी सहूलियत के नाम पर खिलवाड़ हो रहा है। गांधी वार्ड में भर्ती 13 वर्षीय हमजा अली को चिकित्सक ने 14 सितंबर को तत्काल अल्ट्रासाउंड का परामर्श दिया। परिजनों के मुताबिक, काउंटर पर मरीज की नाजुक स्थिति की दुहाई देने के बावजूद सिस्टम पसीजा नहीं और बच्चे को 10 दिन बाद यानी 24 सितंबर की तारीख दी गई। केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह का कहना है कि मरीजों का दबाव अधिक रहता है इसलिए जांच की तारीख देनी पड़ती है। हालांकि, इमरजेंसी वाले मरीजों की जांच जल्द कर दी जाती है।


