दिल्ली

BYJU’S के फाउंडर को सिंगापुर कोर्ट से बड़ा झटका, रवींद्रन को छह महीने की जेल और लाखों का जुर्माना

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सिंगापुर की एक अदालत ने मांगी गई जानकारी उपलब्ध न कराने के लिए अवमानना के मामले में बायजूज़ के संस्थापक बायजू रवींद्रन को छह महीने की जेल की सजा सुनाई। हालांकि, रवींद्रन ने कहा कि यह फैसला सिर्फ कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा है और उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया। उन्होंने कहा कि वह इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे। इस फैसले को एक समय भारत के सबसे बड़े स्टार्टअप माने जाने वाले बायजूज़ के संस्थापक के लिए अब तक का सबसे बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है।

बायजूज़ कोविड महामारी के बाद कारोबार में आई तेज गिरावट के कारण निवेशकों से विवाद, कर्ज से जुड़े मुकदमों और संचालन जारी रखने के लिए जूझ रहा है। अदालत ने रवींद्रन को अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करने, 90,000 सिंगापुर डॉलर (करीब 70,500 अमेरिकी डॉलर) कानूनी खर्च के रूप में जमा करने और सिंगापुर में स्थित बीअर इन्वेस्टको पीटीई नामक कंपनी में अपनी हिस्सेदारी से जुड़े दस्तावेज पेश करने का आदेश दिया।

बीअर इन्वेस्टको पीटीई की बायजूज़ से जुड़ी कंपनी में हिस्सेदारी थी। यह तत्काल स्पष्ट नहीं हो पाया कि आदेश दिए जाने के समय रवींद्रन सिंगापुर में मौजूद थे या नहीं। उनके वकीलों ने कहा कि वह इस फैसले के खिलाफ अपील करने और अदालत के आदेश पर अस्थायी रोक लगाने का अनुरोध करने पर विचार कर रहे हैं। यह मुकदमा कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी की एक सहयोगी कंपनी ने दायर किया था।

इस कंपनी ने उस समय बायजूज़ में निवेश किया था, जब कंपनी कर्मचारियों की छंटनी और बढ़ते वित्तीय दबाव से जूझ रही थी। अदालत की अवमानना का यह मामला बायजूज़ से जुड़े बड़े कानूनी विवादों में एक और नया मामला है। इनमें अमेरिका में जारी मुकदमा भी शामिल है, जहां कर्ज देने वाले पक्ष 1.2 अरब अमेरिकी डॉलर के ‘टर्म लोन’ से हुए नुकसान की भरपाई की मांग कर रहे हैं।

फैसले के बाद जारी बयान में रवींद्रन ने कहा कि जीएलएएस ट्रस्ट और कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी समेत कर्जदाताओं और निवेशकों के साथ समझौते की बातचीत लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी। उन्होंने इस नए कानूनी कदम को “बेवजह मामला बढ़ाने” जैसा बताया। उन्होंने कहा, “सभी पक्ष यह भी मान चुके हैं कि मैंने या अन्य संस्थापकों ने कोई गलत काम नहीं किया।

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